'श्री वाणी' एक ऐसी संस्था है जो धार्मिक ग्रन्थों के प्रचार प्रसार में अग्रसर है | साहित्य का ना केवल प्रकाशन कराकर जनसमुदाय तक पहुंचाने का कार्य करती है अपितु यह संस्था आधुनिक साधनो का प्रयोग कर आज की युवा पीढ़ी को धर्म से जोड़ने का भी कार्य पुरजोर तरीके से कर रही है |
'श्री' अर्थात जिनेन्द्र भगवन और 'वाणी' अर्थात जिनराज प्रभु का उपदेश जिसे मुनिराज के माध्यम से प्राप्त कर उसे लिखित , चित्र , चलचित्र , संगीत , स्वर आदि के माध्यम से प्रचारित करना ही इस संस्था का मुख्य उदेश्य है | यह जैन धर्म से प्रेरित व प्रभावित संस्था मानव जीवन में धर्म की महिमा व महत्ता को प्रस्तुत करने की भावना को पूर्ण करने के लिए सदैव तत्पर संस्था है |
इस संस्था में जैन अनुयायी व जैन धर्मानुरागी अपने विचारो को खुले मंच से भी प्रचारित करने का उदेश्य निश्चित करता है | जैन धर्म के मुख्य सिद्धांतो , कठिन शब्द व उपदेशो को वर्तमान पीढ़ि के अनुकूल बनाते हुए संतो के आश्रय से कथा - कहानिया , लघु प्रवचन , शिक्षाए , कविता - पाठ , स्तोत्र आदि के साथ साथ लोक प्रसिद्ध हिंदी और अंग्रेजी भाषाओ में प्रकाशित कर अल्प राशि में जनसमूह तक पहुँचाना इस संस्था का कार्य है |
इस संस्था का गठन प. पू. अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी दिगम्बर संत आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज की मंगलमयी पवन प्रेरणा से फरवरी 2019 के दिन दिल्ली में हुआ |
आप भी इस संस्था से जुड़कर ज्ञान ज्योति के प्रचार - प्रसार में हमारे सहयोगी बने |
जय जिनेन्द्र |